आइए बिहार की भाषाओं से आपका परिचय कराएं।

आइए बिहार की भाषाओं से आपका परिचय कराएं।

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आइए बिहार की भाषाओं से आपका परिचय कराएं।

जिस तरह से यूरोप में जर्मन, फ्रेन्च, इतालवी, अंग्रेजी आदि भिन्न भाषाएँ बोली जाती है, उसी प्रकार से बिहार में कोई बिहारी भाषा नहीं बोली जाती है। भोजपुरी, मगधी, मैथिली, वज्जिका और हिन्दी बोली जाती है।

बहुत से लोग ना समझी के कारण सोचते हैं कि बिहार के लोग गलत हिन्दी का प्रयोग करते हैं। नहीं वे अपनी भाषा का प्रयोग करते है। भाषा और बोली में फर्क होता है। किसी भी भाषा का अपना साहित्य होता है जो सभी बिहार के भाषाओं के पास है। हां, इन सभी भाषाओं की लिपि देवनागरी ही है।

पेश हैं कुछ ऐसे शब्द और बातें जो सिर्फ बिहार के लोग सही से बोल पायेंगे :-

  1. बलवा काहे नहीं कटवाते हो बे
  2. मिज़ाज लहरा दिया
  3. तनी-मनी तरकारी दे दो
  4. अभरी गेंद ऐने आया तो ओने बीग देंगे
  5. बिस्कुटिया चाय में बोर-बोर के खाओ जी
  6. छुच्छेकाहे खाना खा रहे हो
  7. काम लटपटा गया है
  8. बड़ी भारी है-दिमाग में कुछो नहीं ढ़ूक रहा है
  9. बदमाशी करबे त नाली में गोत देबौ
  10. सत्तू घोर के पी लो
  11. तखनि एसे ई माथा खराब कैले है
  12. बरसतवा में छतवा चुवे लगता है मरदे!
  13. नरभसाइये मत
  14. मार मार के भुरकुस छोड़ा देंगें
  15. कपड़वा पसार दो
  16. ए मरदे, ई का कह रहे है?
  17. जादे बोलियेगा तो मुंहवे नोच लेंगें

Proud to be Bihari

काहे की –
हमलोग के यहाँ idiot नहीं “बकलोल”होता है।।
हमलोग कटने पे बोरोलीन लगाते हैं,क्यूंकि dettol से “परपराने” लगता है।।
हमलोग जान से नहीं ना मारते हैं “मार के मुआ देते हैं”।।
हमलोग गला दबाते नही “नट्टी_टीप देते हैं”।।
हमलोग awesome काम नहीं करते “गर्दा_उड़ा देते हैं”।।
हमलोग tension में नहीं आते बस “हदस” जाते हैं या नरभसा जाते हैं ।।
हमलोग का bad day नहीं होता बस “जत्रा खराब होता है”।।
हमलोग का कपड़ा धोया नहीं “फिंचा” जाता है।।
हमलोग ताकत नहीं “बरियारी” दिखाते हैं।।
हमारे लिए train चलती नही “खुल” जाती है।।
हमारे यहाँ बच्चा नहीं “बुतरू” होता है।।
हमलोग show off नही “सुखल_फुटानी” करते हैं।।
हमारे ईंहा कोई uncivilized नहीं होत बस “चुहाड़”कहलाता है।।
हमारे ईंहा मूँगफली की जगह बूटबदाम या चिनिया बदाम होता है
बिहार के कुतवा काटता नहीं, हबक लेता हैं
बिहार के मच्छर काटता नहीं, #भम्भोर लेता हैं।
अच्छा साबुन कपड़ा को साफ करके ऊज्जर बना देता है, फेयर और लवली लगाने से रंग भभक के ऊज्जर हो जाताहै
Finally we don’t believe in competition काहे की “हमसे कोई नही सकेगा”।

“जय बिहार”