ममता ‘दीदी’ को मात देने के लिए शाह की ये 5 रणनीति

ममता ‘दीदी’ को मात देने के लिए शाह की ये 5 रणनीति

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ममता ‘दीदी’ को मात देने के लिए शाह की ये 5 रणनीति

Dated : 21 Dec 2020 (IST)

पश्चिम बंगाल में दीदी के किले को ध्वस्त करने के लिए भाजपा अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। अमित शाह की रणनीतियां तैयार कर रहे हैं, जिसके जरिए बंगाल को भगवामय करने की तैयारी चल रही है।
भाजपा के ‘चाणक्य’ अमित शाह ने ममता दीदी के गढ़ में जाकर उनकी नाकामी पूरी दुनिया के सामने ला दी। गृह मंत्री ने बीते वर्षों में बंगाल की बगड़ती हालत का एक-एक सबूत आंकड़ों के साथ पेश कर दिया।
पश्चिम बंगाल (West Bengal) में होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Election) को लेकर सियासी सरगर्मी तेज होती जा रहा है। अमित शाह (Amit Shah) ने अपने बंगाल दौरे के दूसरे दिन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पुरानी सरकारों की नाकामी सबके सामने ला दी।

अमित शाह ने कहा कि “भारत के सबसे बड़े दल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर ये हमला केवल भाजपा के अध्यक्ष पर हमला नहीं है बल्कि बंगाल के अंदर लोकतंत्र के की व्यवस्था पर हमला है। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी तृणमूल कांग्रेस की सरकार की, तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की है। मैं आज इस प्रेस वार्ता के माध्यम से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सभी नेताओं को बताना चाहता हूं कि आप गलतफहमी में मत रहिए कि इस प्रकार के हमले से से भाजपा की गति, भाजपा का कार्यकर्ता रुकेगा या भाजपा अपने कदम पीछे लेगी।”

उन्होंने कहा कि “जितना इस प्रकार की हिंसा का वातावरण बनाएंगे उतना ही भाजपा (BJP) और मजबूती के साथ बंगाल (Bengal) में अपने आप को मजबूत करने का परिश्रम करेगी। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने तय किया है कि हिंसा का जवाब हम लोकतांत्रिक तरीकों से देंगे। बंगाल में आने वाले चुनाव में इस सरकार को हम परास्त करके दिखाएंगे।”

अमित शाह ने कहा कि “बंगाल में राजनीतिक हिंसा चरम पर है। 300 से ज्यादा भाजपा के कार्यकर्ताओं (BJP Workers) की हत्या की गई है। भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के मामले की जांच में एक इंच भी प्रोग्रेस कहीं पर दिखाई नहीं पड़ती है।” इसके अलावा अमित शाह ने बंगाल से जुड़े कुछ आंकड़े प्रस्तुत करते हुए दीदी से सवाल किया।

दीदी बताइये, कौन है जिम्मेदार?

“1960 में बंगाल की प्रति व्यक्ति आय लगभग दोगुनी थी। आज, यह भारत की व्यापारिक राजधानी का आधा भी नहीं है! इसके लिए कौन जिम्मेदार है?”

“1960 में बंगाल भारत के सबसे अमीर राज्य में शुमार हुआ करता था। आज बंगाल बहुत काफी नीचे है! इसके लिए कौन जिम्मेदार है?”

“1950 के दशक में, भारत का 70% फार्मा उत्पादन बंगाल में किया गया था। आज, यह 7% तक गिर गया है! इसके लिए कौन जिम्मेदार है?”

“1960 में बंगाल की प्रतिव्यक्ति आय महाराष्ट्र से अधिक थी, आज महाराष्ट्र की आधी भी नहीं है। इसके लिए कौन जिम्मदार है?”

“बंगाल का जूट उद्योग भी काफी कमजोर हुआ है। भारत में 32 में से बंगाल औद्योगिक विकास में 20 वें स्थान पर है और इसका सीएजीआर आज केवल 5।74% है। सेवा क्षेत्र में वृद्धि दर 5।8% है और यह 28 वें स्थान पर है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?”

“बंगाल में एफडीआई 2011 से अब तक सिर्फ 1% पर जारी है। नीचे गिरने की कोई जगह नहीं है! TMC सरकार एक उपलब्धि के रूप में गिना जा सकता है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?”

“बंगाल में शिक्षा क्षेत्र में 90% प्राथमिक स्कूलों में डेस्क नहीं है, 30% से ज्यादा स्कूलों में पर्याप्त क्लासरूम नहीं है, 10% स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं है, 56% स्कूलों में शौचालय नहीं है। शिक्षा के क्षेत्र में ये बंगाल की स्थिति है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?”

बंगाल में अमित शाह के प्रचंड आरम्भ ने दीदी को हिला कर रख दिया है। बंग की जंग में यलगार हुआ और अमित शाह ने ममता दीदी के क़िले में कई छेद कर डाले।

दीदी के गढ़ में शाह की रणनीति

1 बंगाल का गौरव दिखाना

बंगाल में पहुंचने के साथ अमित शाह ने मंदिरों से लेकर बंगाल से जुड़े महापुरुष के अहम स्थानों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ये सॉफ़्ट हिन्दुत्व के साथ-साथ बंगाल के वोटरों से खुद को जोड़ने की कवायद है, ये कोशिश है ये दिखाने की कि बीजेपी का चरित्र पश्चिम बंगाल के चरित्र से अलग नहीं है। अमित शाह की नज़र पश्चिम बंगाल के 70 फीसदी हिन्दू मतदाता पर है।

2 बागियों से दीदी को कमज़ोर करना

जिन ममता बनर्जी ने सालों से चली आ रही वामदल की सरकार को बंगाल से ना सिर्फ उखाड़ फेंका बल्कि फिर बंगाल में जगह नहीं बनाने दी, उनके मज़बूत क़िले में कई छेद कर के अमित शाह उसे कमज़ोर करते जा रहे हैं। इतना ही नहीं वो बंगाल के लोगों को बता देना चाहते हैं कि ममता दीदी की सरकार जिस तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त है और केंद्र सरकार की योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचने नहीं दे रही है, उससे उन्ही की पार्टी के लोग और उनके विधायक और सांसद ख़फ़ा हैं।

इस मौके पर अमित शाह ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि आप किसानों का समर्थन करती हैं फिर क्यों किसानों तक छह हज़ार रुपये पहुंचने नहीं दे रहीं। उन्होंने कहा कि पहले बंगाल अमीर राज्यों में से एक था और आज बंगाल टोलबाजी और भ्रष्टाचार में नंबर 1 है।

3 पिछड़ों का सहारा बनने की कोशिश

अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में पहले दलित के घर भोजन किया, फिर किसान के घर और फिर एक लोक गायक घर। वो दिखाना चाहते हैं कि उनकी पार्टी प्रदेश की 34 फीसदी SC/ST जनता के साथ है और साथ ही ओबीसी और किसानों के ज़रिए भी साल 2016 के 17% वोटबैंक को बढ़ाने की जुगत में जिसमें बीजेपी पहले भी कामयाब रही है और अभी शाह की बंगाल टीम उतरनेवाली है जिसमें ओबीसी।

शाह ने ये आरोप लगाया कि बंगाल सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है। शाह ने कहा कि तूफान के बाद भी लोगों तक केंद्र का पैसा नहीं पहुंचने दिया गया।

4 मछुआरों से जुड़ने की कोशिश

अमित शाह अपने प्रेस कांफ्रेंस में तूफान और केंद्र से मिले पैसों को प्रभावित लोगों तक ना पहुंचाने का मुद्दा इसलिए उठाते हैं क्योंकि मछुआरों और मातुओं से उन 50 विधानसभा सीटों को साधने की कोशिश कर रहे हैं जो इन दलित शरणार्थियों के वोटबैंक पर ही निर्भर करता है।

जेपी नड्डा पर हुआ हमला सिर्फ नड्डा पर हमला नहीं, बंगाल में लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सब को अपनी बात रखने का हक है। इस तरह की हिंसा से हम डरेंगे नहीं। जितना इस तरह का वातावरण बनाएं, हम उतनी मज़बूती से वापसी करेंगे।

5 कानून व्यवस्था पर वार

पिछले कई महीनों से बीजेपी लगातार ममता सरकार पर आरोप लगा रही है कि राज्य में बीजेपी कार्यकर्ताओँ को निशाना बनाया जा रहा है, और इसे देखते हुए केंद्र और राज्य में खींचतान भी देखने को मिली। तीन IPS अफसरों को दिल्ली बुलाया गया तो ममता ने इसकी मंज़ूरी नहीं दी। फिर मुख्य सचिव और डीजीपी को तलब भी किया गया। बीजेपी ना सिर्फ इससे राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करती है बल्कि बंगाल के लोगों की सहानुभूति भी हासिल करना चाहती है।

बंगाल में शाह की ये रणनीति काम करती भी दिख रही है, अमित शाह के रोड शो में अच्छी खासी भीड़ दिखी और पिछले दो चुनावों में बीजेपी का जिस तरह का प्रदर्शन रहा है, उसके मुताबिक एंटी इनकमबेंसी का फायदा किसी और दल को नहीं बल्कि बीजेपी को ही हासिल होता दिख रहा है।

Source: article  by: माधव तिवारी